।श्री माँ की अमृतवाणी।*
पुरुषार्थ एवं दैवी कृपा
*२७.
//pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js
(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});
*२७.
//pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js
(adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({});
- साधना में, कथनी और करनी में सच्चे रहो।
- तुम धन्य हो जाओगे!उनका आशिर्वाद जगत के सभी प्राणियों पर सदैव बरस रहा है।
- उसके लिए निवेदन करने की आवश्यकता नहीं।
- सच्चे मन से ध्यान करो।
- तब तुम्हें उनकी असीम कृपा का बोध होगा।
- ईश्वर चाहते हैं सरलता-निष्कपटता, सच्चाई और प्रेम।
- केवल भावपूर्ण शब्दों की झड़ी से उन्हें प्रसन्न नहीं किया जा सकता।*
जय जय माँ,जय माँ।
*।जपात् सिद्धि-श्रीमाँ।*
*।जपात् सिद्धि-श्रीमाँ।*