Ma’s Amritwani II श्री माँ की अमृतवाणी।* पुरुषार्थ एवं दैवी कृपा

।श्री माँ की अमृतवाणी।*

पुरुषार्थ एवं दैवी कृपा
*२८. ऐसे कितने लोग हैं जो सचमुच भगवान को चाहते हैं? कहाँ है ऐसी निष्ठा एवं व्याकुलता? एक ओर तो इनकी भक्ति आग्रह का भाव और दुसरी ओर जहाँ थोडे से भोग पदार्थ मिल जाएँ तो उसी में सन्तुष्ट। कहते हैं, ‘उनकी कैसी दया है।’*
जय जय माँ,जय माँ।
*।जपात् सिद्धि-श्रीमाँ।*

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