।।श्रीरामकृष्ण वचनामृत।।
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Sri Ramakrishna
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(भाग १-पेज-६०९ता.१४.९.१८८४)
अब हरिनाम के माहात्म्य की बात हो रही है।
_भवनाथ:- नाम करने पर मेरी देह हलकी पड़ जाती है।_
*श्रीरामकृष्ण :-“वे पाप का हरण करते हैं, इसीलिए उन्हें हरि कहते हैं। वे त्रिताप के हरण करनेवाले हैं।”*
*“और चैतन्य देव ने इस नाम का प्रचार किया था, अतएव अच्छा है। देखो, चैतन्य देव कितने बड़े पण्डित थे और वे अवतार थे। उन्होंने इस नाम का प्रचार किया था, अतएव यह बहुत ही अच्छा है।(हँसते हुए) कुछ किसान एक न्योते में गये थे। भोजन करते समय उनसे पूछा गया, तुम लोग आमड़ें की खटाई खाओगे? उन्होंने कहा, बाबुओं ने अगर उसे खाया हो तो हमें भी देना। मतलब यह कि उन्होंने खाया होगा तो वह चीज अच्छी ही होगी।” (सब हँसते हैं।)* …….
(क्रमशः)…
जय जय रामकृष्ण।
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