।।श्रीरामकृष्ण वचनामृत।।
(भाग १-पेज-६०९ता.१४.९.१८८४)
_गवयै के साथ नरेन्द्र का वादविवाद हुआ था, उसी की बात चल रही है। ….._
_मुखर्जी:- नरेंद्र ने भी मोर्चा नहीं छोड़ा।_
*श्रीरामकृष्ण :-“हाँ, ऐसी दृढ़ता तो चाहिए ही। इसे सत्व का तम कहते हैं। लोग जो कुछ कहेंगे क्या उसी पर विश्वास करना होगा? वेश्या से क्या यह कहा जायगा कि तुम्हें जो रूचे वही करो? तो वेश्या की बात भी माननी होगी। मान करने पर एक सखी ने कहा था – ‘राधिका को अहंकार हुआ है।’ वृन्दे ने कहा, “यह ‘अहं’ किसका है? – यह उन्हीं का अहंकार है – कृष्ण के ही गर्व से वे गर्व करती हैं।”* ……(क्रमशः)…
*श्रीरामकृष्ण :-“हाँ, ऐसी दृढ़ता तो चाहिए ही। इसे सत्व का तम कहते हैं। लोग जो कुछ कहेंगे क्या उसी पर विश्वास करना होगा? वेश्या से क्या यह कहा जायगा कि तुम्हें जो रूचे वही करो? तो वेश्या की बात भी माननी होगी। मान करने पर एक सखी ने कहा था – ‘राधिका को अहंकार हुआ है।’ वृन्दे ने कहा, “यह ‘अहं’ किसका है? – यह उन्हीं का अहंकार है – कृष्ण के ही गर्व से वे गर्व करती हैं।”* ……(क्रमशः)…
जय जय रामकृष्ण।
*।।ईश्वर-प्राप्ति जीवन का उद्देश्य।।*
*।।ईश्वर-प्राप्ति जीवन का उद्देश्य।।*