“हवाई जहाज होता तो इस ट्रैफिक का झंझट नही होता”



बहुत ही सुंदरपंक्तियां भेजी है, फारवर्ड करने सेखुद को रोकनहीं पाया ….
जब भी अपनीशख्शियत पर अहंकारहो,
एक फेरा शमशानका जरुर लगालेना।
और….
जब भी अपनेपरमात्मा से प्यारहो,
किसी भूखे कोअपने हाथों सेखिला देना।
जब भी अपनीताक़त पर गुरुरहो,
एक फेरा वृद्धाआश्रम का लगालेना।
और….
जब भी आपकासिर श्रद्धा सेझुका हो,
अपने माँ बापके पैर जरूरदबा देना।
जीभ जन्म सेहोती है औरमृत्यु तक रहतीहै क्योकि वोकोमल होती है.
दाँत जन्म केबाद में आतेहै और मृत्युसे पहले चलेजाते हैं…  
  क्योकि वो कठोरहोते है।
छोटा बनके रहोगेतो मिलेगी हर
बड़ी रहमत
बड़ा होने परतो माँ भीगोद से उतार
देती है..
किस्मत और पत्नी
भले ही परेशानकरती है लेकिन
जब साथ देतीहैं तो
ज़िन्दगी बदल देतीहैं.।।
प्रेम चाहिये तो समर्पणखर्च करना होगा।
विश्वास चाहिये तो निष्ठाखर्च करनी होगी।
साथ चाहिये तो समयखर्च करना होगा।
किसने कहा रिश्तेमुफ्त मिलते हैं
मुफ्त तो हवाभी नहीं मिलती
एक साँस भीतब आती है,
जब एक साँसछोड़ी जाती है!!”?.: 
नंगे पाँव चलतेइन्सानको लगताहै
किचप्पल होतेतो अच्छाहोता
बाद मेँ……….
साइकिल होती तोकितना अच्छा होता
उसके बाद में………
मोपेड होता तोथकान नही लगती
बाद में………
मोटर साइकिल होतीतो बातोबातोमेँ
रास्ता कट जाता
फिर ऐसा लगाकी………
कार होती तोधूप नही लगती
फिर लगा कि,
हवाई जहाज होतातो इस ट्रैफिकका झंझट
नही होता
जब हवाई जहाजमें बैठकर नीचेहरेभरे घासके मैदान
देखता है तोसोचता है,
किनंगे पावघास में चलतातो दिल
को कितनीतसल्लीमिलती”…..
जरुरत के मुताबिकजिंदगीजिओ – “ख्वाहिश”….. के
मुताबिक नहीं………
क्योंकिजरुरत
तोफकीरोंकीभीपूरीहोजाती है, और
ख्वाहिशें’….. ‘बादशाहोंकी भीअधूरीरह जातीहै”…..
जीतकिसके लिए, ‘हारकिसके लिए
ज़िंदगी भरयेतकरारकिसके लिए
जो भीआयाहै वोजायेगाएक दिन
फिर ये इतनाअहंकारकिसके लिए
बुरे वक़्त!
ज़राअदबसेपेश !!
वक़्तही कितनालगता है
वक़्तबदलने में………
मिली थीजिन्दगी’ , किसी के
     ‘कामआने के लिए…..
परवक्तबीतरहा है , “कागजकेटुकड़े” “कमानेके लिए………

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