गीता में साफ़ शब्दो मे लिखा है

  1. _*गीता में साफ़ शब्दो मे लिखा है..*_
  2. _*निराश मत होना..*_
  3. _*कमजोर तेरा वक्त है..*_
  4. _*तू नही……..*_
  5. _*ये संसार “जरूरत” के नियम पर चलता है….*_
  6. _*सर्दियो में जिस “सूरज”*_
  7. _*का इंतजार होता है,*_
  8. _*उसी “सूरज” का गर्मियों में*_
  9. _*तिरस्कार भी होता है…..*_
  10. _*आप की कीमत तब तक होगी जब तक आपकी जरुरत है…!*_
  11. *”तालाब एक ही है..,*
  12. *उसी तालाब मे हंस मोती चुनता है और बगुला मछली…!*
  13. *सोच सोच का फर्क होता है…!*
  14. *आपकी सोच ही आपको बड़ा बनाती है…!!*
  15. *यदि हम गुलाब की तरह खिलना*
  16. *चाहते हो तो  काँटों के साथ*
  17. *तालमेल की कला सीखनी होगी*…

           
               ☀

*हँसते रहिये हंसाते रहिये*
        *सदा मुस्कुराते रहिये*
                    *☀*
                *स्नेह वंदन*
*सत्य को कहने के लिए किसी,*
          *शपथ की जरूरत नहीं होती।*
*नदियों को बहने के लिए किसी,*
          *पथ की जरूरत नहीं होती।*
*जो बढ़ते हैं जमाने में,*
          *अपने मजबूत इरादों के बल,*
*उन्हें अपनी मंजिल पाने के लिए,*
          *किसी रथ की जरूरत नहीं होती।*
*मँज़िले बड़ी ज़िद्दी होती हैँ , हासिल कहाँ नसीब से होती हैं !*
*मगर वहाँ तूफान भी हार जाते हैं , जहाँ कश्तियाँ ज़िद पर होती हैँ !*
*भरोसा ” ईश्वर ” पर है, तो जो लिखा है तकदीर में, वो ही पाओगे !*
*मगर , भरोसा अगर ” खुद ” पर है ,तो ईश्वर वही लिखेगा , जो आप चाहोगे !!!*
           
 
*काश*
*कोई ऐसा दर्जी मिल जाता*
*जो रिश्तों में*
*गलतफहमियों’ से हुए छेद को*
*सफाई से रफू कर देता*
” दर्पण ” जब चेहरे का*
*” दाग ” दिखाता है,*
*तब हम ” दर्पण ” नहीं तोडते,*
*बल्की ” दाग ” साफ करते हैं |*
                 *उसी प्रकार,  हमारी*
                 *” कमी ” बताने वाले*
                *पर ” क्रोध ” करने के*
                *बजाय अपनी ” कमी* “
                       *को दूर करना*
                       *”श्रेष्ठ ” हैं !!                            

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