How can one get escape from one’s past karma?
“One can not escape the effect of one’s past karma. But then, if a person leads a prayerful life, he gets off with only the prick of a thorn in the leg, whereas he was to suffer from a deep cut.”—————Sri Sarada Devi.
।।श्री माँ की अमृतवाणी।।
।।जीवन का रहस्य एवं ईश्वरबोध।।
।।जीवन का रहस्य एवं ईश्वरबोध।।
११.लोग कहते हैं, ‘यह दुःख है, वह दुःख है – भगवान को मैंने इतना पुकारा, तो भी दुःख दूर नहीं हुए।’ परन्तु दुःख ही तो भगवान की दया का दान है। ….
…. संसार में दुःख किसे नहीं मिला है, बोलो तो? वृन्दा ने कृष्ण से कहा था, ‘कौन कहता है कि तुम दयामय हो? राम अवतार में तुमने सीता को रुलाया, कृष्ण अवतार में राधा को रुला रहे हो। और तुम्हारे माता-पिता कंस के कारागार में कष्ठ पाते हुए दिन-रात “कृष्ण कृष्ण” करते रहे। तो भी तुम्हें इसलिए पुकारती हूँ कि तुम्हारे नाम से यम का भय नहीं रहता।’
…. संसार में दुःख किसे नहीं मिला है, बोलो तो? वृन्दा ने कृष्ण से कहा था, ‘कौन कहता है कि तुम दयामय हो? राम अवतार में तुमने सीता को रुलाया, कृष्ण अवतार में राधा को रुला रहे हो। और तुम्हारे माता-पिता कंस के कारागार में कष्ठ पाते हुए दिन-रात “कृष्ण कृष्ण” करते रहे। तो भी तुम्हें इसलिए पुकारती हूँ कि तुम्हारे नाम से यम का भय नहीं रहता।’
जय माँ।जय माँ।जय माँ।जय माँ।