श्रीरामकृष्ण देव — गुरु की बातों पर विश्वाश करना । उनके आदेश के अनुसार चलने पर ईश्वर के दर्शन हो सकते है । जैसे डोर अगर ठिकाने लगी हुई हो तो उसे पकड़कर चलने से पते पर पहुंचा जा सकता है ।

 🌹 श्रीरामकृष्ण वचनामृत 🌹
🍀🍁🍀 प्रथम भाग 🍀🍁🍀
🌹 परिच्छेद 90  पृष्ट संख्या 605 🌹
🌼 साधक — महाराज , उपाय क्या है ?
🍁 श्रीरामकृष्ण देव — गुरु की बातों पर विश्वाश करना । उनके आदेश के अनुसार चलने पर ईश्वर के दर्शन हो सकते है । जैसे डोर अगर ठिकाने लगी हुई हो तो उसे पकड़कर चलने से पते पर पहुंचा जा सकता है ।
🌼 साधक — क्या उनके दर्शन हो सकते है ?
🍁 श्रीरामकृष्ण देव — वे विषय – बुद्धि के रहते नही मिलते । कामिनी और कांचन का लेश मात्र रहते उनके दर्शन नही हो सकते । वे शुद्ध मन  और शुद्ध बुद्धि से गोचर होते है । वह मन चाहिए जिसमे आसक्ति का लेशमात्र न हो । शुद्ध – मन , शुद्ध – बुद्धि और शुद्ध आत्मा , ये एक ही वस्तु है ।
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