. सुप्रभातम्
माँ की वाणी
शरीर धारण करने में कोई सुख नहीं है । संसार दुःखमय ही है । केवल भगवान के नाम कीर्तन में ही सुख है । जिन पर ठाकुर की कृपा हुई है केवल वे ही उन्हें भगवान के रूप में जान पाये है । और केवल यही उनका सुख है ।
सच्ची प्रार्थना
एक गाड़ीवान ने यहूदी धर्माचार्य रबी बर्डिक्टेव के पास जाकर पूछा, “महाराज, मैं एक गाँव से दूसरे गाँव गाड़ी हाँका करता हूँ । यह पेशा मुझे पसन्द नहीं, क्यों कि मैं भगवान की प्रार्थना के लिए सेनेगाग (मंदिर) जाने को नियमित समय नहीं दे पाता । मुझे अब यह पेशा छोड़ देने के अलावा अन्य कोई रास्ता सूझ नहीं रहा है ।”
इस पर रबी ने पूछा, “क्या तुम्हारी गरीब बूढ़े यात्रियों से कभी भेंट होती है ?” “जीहाँ, मुझे गरीब, दीन-दुखी यात्री अवश्य दिखायी देते हैं और मैं उन्हे मुफ्त में सवारी भी दिया करता हूँ ।” — गाड़ीवान ने जवाब दिया ।
तब तुम इस पेशे को कदापि न छोड़ों । तुम इस पेशे में कहकर ही भगवान् की प्रार्थना करते आ रहे हो, क्यों कि दिन-दुखियों की सेवा ही भगवान् की सेवा है और यही भगवान् की सच्ची प्रार्थना है ।”