रक्षाबन्धनं श्रावणमासस्य शुक्लपूर्णिमायाम् आचर्यते II रक्षाबन्धन मन्त्रः

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रक्षाबन्धनं श्रावणमासस्य शुक्लपूर्णिमायाम् आचर्यते । 

भ्रातृभगिन्योः पवित्रसम्बन्धस्य सम्मानाय एतत् पर्व भारतीयाः आचरन्ति । 

निर्बलतन्तुना बद्धः भ्रातृभगिन्योः सबलसम्बन्धः भारतीयसंस्कृतेः गहनतायाः प्रतीकः ।

               रक्षाबन्धन मन्त्रः

  1. येन बद्धो वली राजा दानवेन्द्रो महाबलः ।
  2. तेन त्वा प्रतिबध्नामि रक्षे माचल माचल ॥
  3. अर्थात् जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बांधा गया था, उसी रक्षाबंधन के पवित्र सूत्र को मैं तुम्हें बांधती हूं, जो तुम्हारी रक्षा करेगा।

भाई इसे इस तरह बोलेंं, जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बांधा गया था उस पवित्र सूत्र के बंधन की सौगंध बहन, मैं तुम्हारी हर विपत्ति में रक्षा करूंगा

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