আমাদের…অতীত মহৎ ভবিষ্যত মানুষের সেবা করা হচ্ছে ঈশ্বরের সেবা করা ঈশ্বরপ্রেম ঈশ্বর মানুষ ধর্ম হচ্ছে মানুষের মধ্যে ইতোমধ্যে থাকা দেবত্বের প্রকাশ ধর্ম

p { margin-bottom: 0.25cm; line-height: 120%; } বাণী চিরন্তণী স্বামী বিবেকানন্দ স্বামী বিবেকানন্দ (১২ জানুয়ারি, ১৮৬৩ –৪ জুলাই, ১৯০২; পিতৃদত্ত নাম নরেন্দ্রনাথ দত্ত) ছিলেন একজন ভারতীয় হিন্দু সন্ন্যাসী এবং উনবিংশ শতাব্দীর হিন্দু ধর্মগুরু পরমহংসের প্রধান শিষ্য। পাশ্চাত্য জগতে ভারতের বেদান্ত ও যোগ দর্শনকে পরিচিত করে তোলার ক্ষেত্রে তিনি অন্যতম প্রধান ভূমিকা গ্রহণ করেছিলেন। উনবিংশ শতাব্দীতেContinue reading “আমাদের…অতীত মহৎ ভবিষ্যত মানুষের সেবা করা হচ্ছে ঈশ্বরের সেবা করা ঈশ্বরপ্রেম ঈশ্বর মানুষ ধর্ম হচ্ছে মানুষের মধ্যে ইতোমধ্যে থাকা দেবত্বের প্রকাশ ধর্ম”

What is not civilization? Swami Vivekananda II उतावले मत बनो, किसी दूसरे का अनुकरण करने की चेष्टा मत करो। दूसरों का अनुकरण करना सभ्यता की निशानी नहीं है; यह एक महान् पाठ है, जो हमें याद रखना है। स्वामी विवेकानन्द.

p { margin-bottom: 0.25cm; line-height: 120%; } What is not civilization?                    Do not be in a hurry, do not go out to imitate anybody else. This is another great lesson we have to remember; imitation is not civilization.Swami Vivekanandaउतावले मत बनो, किसी दूसरे का अनुकरण करने की चेष्टा मत करो। दूसरों का अनुकरण करनाContinue reading “What is not civilization? Swami Vivekananda II उतावले मत बनो, किसी दूसरे का अनुकरण करने की चेष्टा मत करो। दूसरों का अनुकरण करना सभ्यता की निशानी नहीं है; यह एक महान् पाठ है, जो हमें याद रखना है। स्वामी विवेकानन्द.”

One feeling—– Swami Someshwantanji

p { margin-bottom: 0.25cm; line-height: 120%; } এক অনুভূতি… বেলুড় মঠে শ্রীরামকৃষ্ণ মন্দিরে তখন নিত্যপুজো করতেন ননীগোপাল মহারাজ । একবার ভোরে শ্রীরামকৃষ্ণের শয়নঘরে এসেছেন তিনি কাজে । ব্রাহ্মমুহূর্ত। চারদিক তখনো অন্ধকার । ঘরে ঢুকতেই দেখলেন, এক লম্বা আলোর জ্যোতি বেলুড়মঠের শ্রীরামকৃষ্ণ মন্দির ও দক্ষিণেশ্বরের কালীমন্দিরকে যুক্ত করে রয়েছে । যেন এক আলোর সেতু । বিস্ময়েরContinue reading “One feeling—– Swami Someshwantanji”

राजा मानसिंह द्ववारा गोविन्ददे के मन्दिर का निर्माण*

p { margin-bottom: 0.25cm; line-height: 120%; } राजा मानसिंह द्ववारा गोविन्ददेके मन्दिर का निर्माण* रघुनाथ भट्ट गोस्वामी के शिष्य द्वारा बनवाया गोविन्ददेव का मन्दिर बहुत दिन बाद जीर्ण–शीर्ण हो गया। तब सन् 1590 में राजा मानसिंह ने बहुत अर्थ व्यय कर वर्तमान लाला पत्थर के विशाल मन्दिर का निर्माण किया, जिसे उत्तर भारत का सबसे आकर्षक और हिन्दू स्थापत्यContinue reading “राजा मानसिंह द्ववारा गोविन्ददे के मन्दिर का निर्माण*”

कुछ प्रेमयुक्त रोष से चौबे की पत्नी ने कहा "इसकी तो आदत ही ऐसी हे, जो भला अपनी सगी माँ का न हुआ तो मेरा क्या होगा।"

p { margin-bottom: 0.25cm; line-height: 120%; } भक्तमाल कथा चटोरे मदनमोहन जी🍲सनातन गोस्वामी जी मथुरा में एक चौबे के घर मधुकरी के लिए जाया करते थे, उस चौबे की स्त्री परमभक्त और मदन मोहन जी की उपासिका थी, उसके घर बाल भाव से मदन मोहन भगवान विराजते थे।असल में सनातन जी उन्ही मदन मोहन जीContinue reading “कुछ प्रेमयुक्त रोष से चौबे की पत्नी ने कहा "इसकी तो आदत ही ऐसी हे, जो भला अपनी सगी माँ का न हुआ तो मेरा क्या होगा।"”

एक छोटा सा बोर्ड रेहड़ी की छत से लटक रहा था,उस पर मोटे मारकर से लिखा हुआ था…..!!

p { margin-bottom: 0.25cm; line-height: 120%; } एक छोटा सा बोर्ड रेहड़ी की छत से लटक रहा था,उस पर मोटे मारकर से लिखा हुआ था…..!! “घर मे कोई नही है,मेरी बूढ़ी माँ बीमार है,मुझे थोड़ी थोड़ी देर में उन्हें खाना,दवा और हाजत कराने के लिए घर जाना पड़ता है,अगर आपको जल्दी है तो अपनी मर्ज़ीContinue reading “एक छोटा सा बोर्ड रेहड़ी की छत से लटक रहा था,उस पर मोटे मारकर से लिखा हुआ था…..!!”

मनुष्य की बुद्धि कितनी है ? चाहेगा कुछ, और माँगेगा कुछ ! अन्त में शिव बनाते-बनाते बन्दर बना बैठेगा ।

p { margin-bottom: 0.25cm; line-height: 120%; }                                                              सुप्रभातम्                                                      🌼    माँ की वाणी    🌼 🍀   मनुष्य की बुद्धि कितनी है ? चाहेगा कुछ, और माँगेगा कुछ ! अन्त में शिव बनाते–बनाते बन्दर बना बैठेगा । इसीलिए उनके शरणागत होकर रहना ही ठीक है । जब जिसे जो चाहिए, वे उसे देंगे । फिर भी भक्तिContinue reading “मनुष्य की बुद्धि कितनी है ? चाहेगा कुछ, और माँगेगा कुछ ! अन्त में शिव बनाते-बनाते बन्दर बना बैठेगा ।”

I Never Experienced any Difficulty.

p { margin-bottom: 0.25cm; line-height: 120%; } Maa Sri Sarada Devi Sayings… @page { margin: 2cm } p { margin-bottom: 0.25cm; direction: ltr; font-variant: normal; color: #181818; letter-spacing: normal; line-height: 120%; text-align: left; orphans: 2; widows: 2; text-decoration: none } p.western { font-family: “Merriweather”, “Georgia”, serif; font-size: 15pt; font-style: normal; font-weight: normal } p.cjk { font-size: 15ptContinue reading “I Never Experienced any Difficulty.”

Sri Ramakrishna and Vidhyasagar -CONVERSATION

p { margin-bottom: 0.25cm; line-height: 120%; } বিদ্যাসাগর একদৃষ্টে তাকিয়ে আছেন শ্রী শ্রী রামকৃষ্ণ পরমহংসদেবের দিকে‚ পান করছেন তাঁর কথামৃত রঞ্জন বন্দ্যোপাধ্যায়নাস্তিক ঈশ্বরচন্দ্র বিদ্যাসাগরের সঙ্গে সাক্ষাৎ হয়েছিল ঠাকুর শ্রী শ্রী রামকৃষ্ণ পরমহংসদেবের | কেমন ছিল দুই কিংবদন্তির সাক্ষাৎ ? জানতে ফিরে যেতে হবে ১৩৩ বছর আগে, সেই মাহেন্দ্রক্ষণে … ১৬ আগস্ট‚ ঠাকুরের প্রয়াণদিবসে দুই মহাপুরুষেরContinue reading “Sri Ramakrishna and Vidhyasagar -CONVERSATION”

श्रीरामकृष्ण देव — गुरु की बातों पर विश्वाश करना । उनके आदेश के अनुसार चलने पर ईश्वर के दर्शन हो सकते है । जैसे डोर अगर ठिकाने लगी हुई हो तो उसे पकड़कर चलने से पते पर पहुंचा जा सकता है ।

 🌹 श्रीरामकृष्ण वचनामृत 🌹🍀🍁🍀 प्रथम भाग 🍀🍁🍀🌹 परिच्छेद 90  पृष्ट संख्या 605 🌹🌼 साधक — महाराज , उपाय क्या है ?🍁 श्रीरामकृष्ण देव — गुरु की बातों पर विश्वाश करना । उनके आदेश के अनुसार चलने पर ईश्वर के दर्शन हो सकते है । जैसे डोर अगर ठिकाने लगी हुई हो तो उसे पकड़कर चलनेContinue reading “श्रीरामकृष्ण देव — गुरु की बातों पर विश्वाश करना । उनके आदेश के अनुसार चलने पर ईश्वर के दर्शन हो सकते है । जैसे डोर अगर ठिकाने लगी हुई हो तो उसे पकड़कर चलने से पते पर पहुंचा जा सकता है ।”

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