पपीते के पत्तो की चाय किसी भी स्टेज के कैंसर को सिर्फ 60 से 90 दिनों में कर देगी जड़ से खत्म

पपीते के पत्तो की चाय किसी भी स्टेज के कैंसर को सिर्फ 60 से 90 दिनों में कर देगी जड़ से खत्म,

पपीते के पत्ते 3rd और 4th स्टेज के कैंसर को सिर्फ 35 से 90 दिन में सही कर सकते हैं।

अभी तक हम लोगों ने सिर्फ पपीते के पत्तों को बहुत ही सीमित तरीके से उपयोग किया होगा, बहरहाल प्लेटलेट्स के कम हो जाने पर या त्वचा सम्बन्धी या कोई और छोटा मोटा प्रयोग, मगर आज जो हम आपको बताने जा रहें हैं, ये वाकई आपको चौंका देगा, आप सिर्फ 5 हफ्तों में कैंसर जैसी भयंकर रोग को जड़ से ख़त्म कर सकते हैं।

ये प्रकृति की शक्ति है और बलबीर सिंह शेखावत जी की स्टडी है जो वर्तमान में as a Govt. Pharmacist अपनी सेवाएँ सीकर जिले में दे रहें हैं।

आपके लिए नित नवीन जानकारी कई प्रकार के वैज्ञानिक शोधों से पता लगा है कि पपीता के सभी भागों जैसे फल, तना, बीज, पत्तिया, जड़ सभी के अन्दर कैंसर की कोशिका को नष्ट करने और उसके वृद्धि को रोकने की क्षमता पाई जाती है।

विशेषकर पपीता की पत्तियों के अन्दर कैंसर की कोशिका को नष्ट करने और उसकी वृद्धि को रोकने का गुण अत्याधिक पाया जाता है। तो आइये जानते हैं उन्ही से।

University of florida ( 2010) और International doctors and researchers from US and japan में हुए शोधो से पता चला है की पपीता के पत्तो में कैंसर कोशिका को नष्ट करने की क्षमता पाई जाती है।

Nam Dang MD, Phd जो कि एक शोधकर्ता है, के अनुसार पपीता की पत्तियां डायरेक्ट कैंसर को खत्म कर सकती है, उनके अनुसार पपीता कि पत्तिया लगभग 10 प्रकार के कैंसर को खत्म कर सकती है जिनमे मुख्य है।

breast cancer, lung cancer, liver cancer, pancreatic cancer, cervix cancer, इसमें जितनी ज्यादा मात्रा पपीता के पत्तियों की बढ़ाई गयी है, उतना ही अच्छा परिणाम मिला है, अगर पपीता की पत्तिया कैंसर को खत्म नहीं कर सकती है लेकिन कैंसर की प्रोग्रेस को जरुर रोक देती है।।

तो आइये जाने पपीता की पत्तिया कैंसर को कैसे खत्म करती है?
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1. पपीता कैंसर रोधी अणु Th1 cytokines की उत्पादन को ब़ढाता है जो की इम्यून system को शक्ति प्रदान करता है जिससे कैंसर कोशिका को खत्म किया जाता है।

2. पपीता की पत्तियों में papain नमक एक प्रोटीन को तोड़ने (proteolytic) वाला एंजाइम पाया जाता है जो कैंसर कोशिका पर मौजूद प्रोटीन के आवरण को तोड़ देता है जिससे कैंसर कोशिका शरीर में बचा रहना मुश्किल हो जाता है।
Papain blood में जाकर macrophages को उतेजित करता है जो immune system को उतेजित करके कैंसर कोशिका को नष्ट करना शुरू करती है, chemotheraphy / radiotheraphy और पपीता की पत्तियों के द्वारा ट्रीटमेंट में ये फर्क है कि chemotheraphy में immune system को दबाया जाता है जबकि पपीता immune system को उतेजित करता है, chemotheraphy और radiotheraphy में नार्मल कोशिका भी प्रभावित होती है पपीता सोर्फ़ कैंसर कोशिका को नष्ट करता है।

सबसे बड़ी बात के कैंसर के इलाज में पपीता का कोई side effect भी नहीं है।।
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कैंसर में पपीते के सेवन की विधि :
कैंसर में सबसे बढ़िया है पपीते की चाय। दिन में 3 से 4 बार पपीते की चाय बनायें, ये आपके लिए बहुत फायदेमंद होने वाली है। अब आइये जाने लेते हैं पपीते की चाय बनाने की विधि।

1. 5 से 7 पपीता के पत्तो को पहले धूप में अच्छी तरह सुखा ले फिर उसको छोटे छोटे टुकड़ों में तोड़ लो आप 500 ml पानी में कुछ पपीता के सूखे हुए पत्ते डाल कर अच्छी तरह उबालें।
इतना उबाले के ये आधा रह जाए। इसको आप 125 ml करके दिन में दो बार पिए। और अगर ज्यादा बनाया है तो इसको आप दिन में 3 से 4 बार पियें। बाकी बचे हुए लिक्विड को फ्रीज में स्टोर का दे जरुरत पड़ने पर इस्तेमाल कर ले। और ध्यान रहे के इसको दोबारा गर्म मत करें।

2. पपीते के 7 ताज़े पत्ते लें इनको अच्छे से हाथ से मसल लें। अभी इसको 1 Liter पानी में डालकर उबालें, जब यह 250 ml। रह जाए तो इसको छान कर 125 ml. करके दो बार में अर्थात सुबह और शाम को पी लें। यही प्रयोग आप दिन में 3 से 4 बार भी कर सकते हैं।

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पपीते के पत्तों का जितना अधिक प्रयोग आप करेंगे उतना ही जल्दी आपको असर मिलेगा। और ये चाय पीने के आधे से एक घंटे तक आपको कुछ भी खाना पीना नहीं है।

कब तक करें ये प्रयोग वैसे तो ये प्रयोग आपको 5 हफ़्तों में अपना रिजल्ट दिखा देगा, फिर भी हम आपको इसे 3 महीने तक इस्तेमाल करने का निर्देश देंगे। और ये जिन लोगों का अनुभूत किया है उन लोगों ने उन लोगों को भी सही किया है, जिनकी कैंसर में तीसरी और चौथी स्टेज थी।
जन हित में साभार संग्रहीत्  !

ভক্তশ্রেষ্ঠ সাধু নাগমহাশয়ের পূণ্য জন্মতিথির শ্রদ্ধার্ঘ্য………………

ভক্তশ্রেষ্ঠ সাধু নাগমহাশয়ের পূণ্য জন্মতিথির শ্রদ্ধার্ঘ্য………………

শ্রীরামকৃষ্ণ ভক্ত শ্রীযুক্ত সুরেশচন্দ্র দত্তের সাথে নাগ মহাশয়ের পরিচয় হলে দুবন্ধু মিলে দক্ষিণেশ্বরে ঠাকুরের সাথে দেখা করতে যান। সেখানে প্রতাপচন্দ্র হাজরা জানান ঠাকুর চন্দননগর গিয়েছেন। হতাশা আর অবসন্নমনে বিদায় নিবেন এমন সময় নাগমহাশয় দেখেন, ভেতরে উত্তরাস্য এক ব্যক্তি একটি ছোট তক্তপোশের উপর পা ছড়িয়ে বসে স্মিতমুখে তাঁদের ইঙ্গিতে ভিতরে ডাকছেন।ভিতরে গিয়ে তারা মেজেতে পাতা মাদুরে বসে সুরেেশবাবু করজোড়ে প্রনাম করলেন আর নাগমহাশয় ভূমিষ্ঠ প্রনামান্তে পদধূলি নিতে গেলে ঠাকুর চরণ স্পর্শ করতে দিলেন না, কথাবার্তায় নাগ মহাশয় বুঝলেন ইনিই দক্ষিণশ্বরের মহাপুরুষ। ঠাকুর তাঁদের পরিচয় জানলেন এবং সংসারে পাঁকাল মাছের ন্যায় নিলির্প্ত হয়ে থাকতে উপদেশ দিলেন। তারপর পঞ্চবটীতে ধ্যান করতে পাঠালেন। ঈশ্বরলাভ – লালসায় উন্মাদপ্রায় নাগমহাশয় একসপ্তাহ পরে আবার ঠাকুরের কাছে গেলে আত্মীয় মিলনের মত উৎফুল্ল কন্ঠে বললেন এসেছো বেশ  করেছো,আমি তোমাদের জন্য এখানে বসে আছি।তারপর নাগ মহাশয়কে বলেন,-“ভয় কি তোমার ত উচ্চ অবস্থা। “নাগ মহাশয়ের মনের সেবার আাকাঙ্খা  পূরনের জন্য ঠাকুর তাঁকে দিয়ে পরপর তামাক সাজানো, গামছা, বটুয়া, জলের গাড়ু আনা ইত্যদি কাজ করালে নাগমহাশয় খুব খুশি হলেন। শুধু ক্ষোভ রইল চরণ ধূলি দেননি। ঠাকুরও উপযুক্ত ভক্ত পেয়ে বললেন —-“দেখছ, এ লোকটা যেন আগুন– জ্বলন্ত আগুন।”
নাগ মহাশয় তৃতীয় বার একাই দক্ষিণেশ্বরে এসেছেন‌ সেদিন ভাবাবস্থ ঠাকুর অস্ফুটস্বরে কি বলতে বলতে উঠে দাঁড়ালেন এবং নাগ মহাশয়কে বললেন , ” ওগো , তুমি না ডাক্তারি করো , দেখ দিকি , আমার পায়ে কি হয়েছে ।” ডাক্তার নাগ মহাশয় পরীক্ষা করে বললেন , ” কৈ , কোথাও তো কিছু দেখছি না ।” ঠাকুর বললেন , ” ভাল

করে দেখ না , কি হয়েছে ।” ভাল করে দেখার প্রয়োজন ছিল না। কিন্তু সাধ মিটিয়ে চরণধূলি নেবার আকাঙ্খা ভক্ত নাগ মহাশয়ের ছিল। তিনি তাই পূর্ণ করলেন । এখন থেকে তিনি জানলেন , শ্রীরামকৃষ্ণ বাঞ্ছাকল্পতরু ভগবান। অতএব সেই দিনই পরীক্ষাচ্ছলে ঠাকুর যখন নিজের শ্রীঅঙ্গ দেখিয়ে তাঁকে জিজ্ঞাসা করলেন ,” তোমার এটা কি বোধ হয় ?” নাগ মহাশয় বিন্দুমাত্র ইতস্ততঃ না করে উত্তর দিলেন ,” ঠাকুর আর আমায় বলতে হবে না ।আমি আপনারই কৃপায় জানতে পেরেছি , আপনি সেই ।” ঠাকুর অমনি সমাধিস্থ হয়ে তাঁর বক্ষে শ্রীচরণ রাখলেন।সহসা নাগ মহাশয় অন্য এক অনুভূতিরাজ‍্যে উপস্থিত হয়ে দেখলেন―সর্বত্র এক দিব‍্য জ‍্যোতি উছলে উঠছে।

আলাসিঙ্গা পেরুমলকে লিখিত II ধৈর্য ধরে থাকো এবং মৃত্যু পর্যন্ত বিশ্বস্ত হয়ে থাকো। নিজেদের মধ্যে বিবাদ ক’রো না।

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(আলাসিঙ্গা পেরুমলকে লিখিত) (২০-১২-১৮৯৫)


আলাসিঙ্গা পেরুমলকে
আলাসিঙ্গা পেরুমলকে 

   … ধৈর্য ধরে থাকো এবং মৃত্যু পর্যন্ত বিশ্বস্ত হয়ে থাকো। নিজেদের মধ্যে বিবাদ ক’রো না। টাকা-কড়ির লেন-দেন বিষয়ে সম্পূর্ণ খাঁটি হও। তাড়াহুড়ো ক’রে টাকা রোজকারের চেষ্টা ক’রো না — ও-সব ক্রমে হবে। আমরা এখনও বড় বড় কাজ ক’রব, জেনো।… যতদিন তোমাদের বিশ্বাস সাধুতা ও নিষ্ঠা থাকবে, ততদিন সব বিষয়ে উন্নতি হবে।…
     … তোমরা যদি সকলে আমাকে ত্যাগ না কর, আমার পশ্চাতে ঠিক খাড়া হয়ে দাঁড়িয়ে থাকতে পারো এবং ধৈর্য না হারাও, তবে আমি তোমাদের নিশ্চয় ক’রে বলতে পারি, আমরা আরও খুব বড় বড় কাজ করতে পারব! হে বৎস, ইংলণ্ডে ধীরে ধীরে খুব বড় কাজ হবে। আমি বুঝতে পারছি, তুমি মাঝে মাঝে নিরুৎসাহ হয়ে পড় ; মনে রেখো, ইতিহাসের এই একমাত্র সাক্ষ্য যে, গুরুভক্ত জগৎ জয় করবে।… বিশ্বাসই মানুষকে সিংহতুল্য বীর্যবান করে। তুমি সর্বদা মনে রেখো, আমাকে কত কাজ করতে হয়। কখন কখন দিনে দু-তিনটা বক্তৃতা দিতে হয়। এইভাবে সর্বপ্রকার প্রতিকূলতা কাটিয়ে পথ ক’রে নিচ্ছি — কঠিন কাজ! আমার চেয়ে নরম প্রকৃতির লোক হ’লে এতেই মরে যেত।… বিশ্বাস ও দৃঢ়তার সহিত লেগে থাকো। সত্যনিষ্ঠ, সাধু ও পবিত্র হও, আর নিজেদের ভেতর বিবাদ ক’রো না। ঈর্ষাই আমাদের জাতির ধ্বংসের কারণ।
(পত্রাবলী – ৩৯৯)

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"স্বামী সরদেশানন্দ বলছেন – তিনি ছোটমামীর(মায়ের কনিষ্ঠ ভ্রাতৃবধূ) মুখে শুনেছেন যে, বিশ্বজয় করে ফেরবার পর স্বামীজী যেদিন প্রথম শ্রীশ্রীমায়ের চরণবন্দনা করলেন, সেদিন, ছোটমামীর ভাষায়ঃ–

“স্বামী সরদেশানন্দ বলছেন – তিনি ছোটমামীর(মায়ের কনিষ্ঠ ভ্রাতৃবধূ) মুখে শুনেছেন যে, বিশ্বজয় করে ফেরবার পর  স্বামীজী যেদিন প্রথম  শ্রীশ্রীমায়ের চরণবন্দনা করলেন, সেদিন,  ছোটমামীর ভাষায়ঃ–

            “রাজার মতো চেহারা, ঠাকুরঝির পায়ে লম্বা হয়ে পড়লো; জোড়হাতে বলল— ‘মা,  সাহেবের ছেলেকে ঘোড়া করেছি, তোমার কৃপায়!'”

এই  দর্শনের  আর  একটি  প্রত্যক্ষদর্শীর বিবরণ পাই কুমুদবন্ধু সেনের স্মৃতিকথায়।

তিনি  লিখেছেনঃ

                              “মা  তাঁর  ঘরের  দরজায়  সর্বাঙ্গ  চাদরে  ঢেকে  নীরবে দাঁড়িয়েছিলেন।

স্বামীজী  তাঁর  সামনে  এসেই  সোজা  মাটিতে  শুয়ে  তাঁকে সাষ্টাঙ্গে  প্রণাম  করলেন।•••

কিন্তু

সাধারণ  রীতি  অনুযায়ী   তাঁর  পাদস্পর্শ  করলেন  না।

তারপর  তিনি  উঠে  দাঁড়িয়ে  উপস্থিত  আমরা  যারা  স্বামীজীর  পিছনে  দাঁড়িয়েছিলাম  তাদেরব কোমল কন্ঠে  বললেনঃ- ‘যাও, মাকে  সাষ্টাঙ্গে  প্রণাম  কর।

কিন্তু

কেউ  তাঁর  চরণ  স্পর্শ  কোরো  না।

তাঁর  এতই  করুণা,  এতই  কোমল  তাঁর  প্রকৃতি,  এতই  স্নেহময়ী  যে  যখন  কেউ  পাদস্পর্শ   করে   তিনি  তাঁর  সর্বগ্রাসী  করুণা,  সীমাহীন  ভালবাসা   এবং  সমবেদনা  দ্বারা   তৎক্ষণাৎ  তার  যাবতীয়  দুঃখকষ্ট  নিজের  মধ্যে  আকর্ষণ  করে  নেন।
তার  ফলে  তাঁকে  নীরবে  অপরের  জন্য  কষ্ট   ভোগ  করতে  হয়।

একে  একে  তাঁর  সম্মুখে  সাষ্টাঙ্গে   প্রণত  হও।

মুখে  কেউ  কিছু  না  বলে   তোমাদের  অন্তরের  অন্তস্থল  থেকে  নীরবে  তাঁর  কাছে  সর্বান্তঃকরণে  প্রার্থণা  কর   ও  তাঁর  আশীর্বাদ  ভিক্ষা  কর।

তিনি  সর্বদাই  অতিলৌকিক  স্তরে  অবস্থান  করেন

এবং

সকলের  মনের  কথা  জানেন — তিনি অন্তর্যামিণী।’ “

‘আমাদের  সকলের   প্রণাম   শেষ   হলে    গোলাপ-মা   নীরবতা  ভঙ্গ   স্বামীজীকে  অত্যন্ত   স্নেহপূর্ণ  স্বরে  বললেন, –  “মা  জানতে  চাইছেন,  দার্জিলিঙে  তোমার  শরীর  কেমন  ছিল? বিশেষ  উপকার  হয়েছে   কি?”

“স্বামীজী —  “হ্যাঁ,  সেখানে  অনেকটা  ভাল  ছিলাম।” …

“গোলাপ-মা –> “মা  বলছেন  ঠাকুর  সর্বদাই  তোমার  সঙ্গে  আছেন। আর  জগতের    কল্যাণের  জন্য  তোমার  আরও  অনেক  কাজ  করতে  হবে।”

“স্বামীজী –> “আমি  প্রত্যক্ষভাবে  দেখতে পাই,  অনুভব করি  এবং  উপলব্ধি  করি যে,- “আমি ঠাকুরের  যন্ত্রমাত্র।
যেভাবে  যেসব  অসাধারণ বিরাট সব  ব্যাপার ঘটছে

আর

যেভাবে  ওদেশের  মেয়ে-পুরুষ  ঠাকুরের  কাজে  জীবন উৎসর্গ  করতে 

এবং

ঠাকুরের  বাণী  প্রচার করতে  আমাকে   নিঃস্বার্থভাবে সাহায্য  করার  আগ্রহ  দেখিয়েছে,

তাতে  আমি  নিজেই  কখন ও  কখন ও  অবাক  হয়ে  যাই।

আমি  মায়ের  আশীর্বাদ  নিয়ে  আমেরিকায়  গিয়াছিলাম;

সেখানে  আমার  বক্তৃতার  মাধ্যমে  মানুষের  মনে  যে  সাড়া  জাগাতে সমর্থ  হয়েছিলাম

এবং

তাঁদের  কাছে  যে  অভাবনীয়  সম্মান  লাভ  করেছিলাম 

তাতে  আমি তৎক্ষণাৎ  বুঝেছিলাম  যে, –  মায়ের  আশীর্বাদের  শক্তিতেই  ঐ  অসম্ভব  সম্ভব   হয়েছিল।”

(শতরূপে সারদা)

স্বাধীনতা দিবস উদযাপন চলছে. রক্তদান শিবিরের থিমলাইন হয়েছে নেতাজির পেল্লাই কাটআউট সহ "তোমরা আমায় রক্ত দাও.

ব্যাপক লেখা।কার লেখা জানি না। কেউ জানলে যদি জানিয়ে দেন,লেখকের নাম দিয়ে আর একবার পোস্ট করবো।
একটা বিন্দাস পাড়া. স্বাধীনতা দিবস উদযাপন চলছে. রক্তদান শিবিরের থিমলাইন হয়েছে নেতাজির পেল্লাই কাটআউট সহ “তোমরা আমায় রক্ত দাও…..”    
স্টেজে সুনীলবাবু উদাত্ত গলায় কবিতা পড়ছেন, “উনসত্তর বছর কেটে গেলো, কেউ কথা রাখেনি.” পাশেই বসে মানিক বাঁড়ুজ্জে. মীর নামে এক বেড়েপাকা ছোকরা হঠাৎ তাঁর সামনে এসে গম্ভীর গলায় রক্তদান শিবিরে পাওয়া প্যাকেট থেকে একটা সেদ্ধডিম বার করে বললো, “তোমার মন নাই কুসুম?” পাশেই ছিলেন বিভূতিভূষণ, ফিচলেমির মাত্রা দেখে সান্ত্বনা দিলেন, “অ মানিকবাবু, ইগনোর করেন, আজকালকার ছেলেপিলেগুলো সব একেকটা বুনিপ তৈরি হয়েছে!”    
খানিক আগে হেমাঙ্গ বিশ্বাস মাউন্টব্যাটেনের গান গেয়ে গেছেন. এবার রহমান মা তুঝে সালাম গাইবেন. সব রেডি, হঠাৎ সাউন্ডচেকের সময় তিড়িং করে স্টেজে উঠে পড়ে চিৎকার করে উঠলেন কবীর সুমন, “গদির লড়াই চলুক যেখানে চলে, হৃদয়ে লড়াই তৃণমূল তৃণমূল !!” উদ্যোক্তারা নেমে আসার অনুরোধ করতেই বাপ-মা-সিপিএম তুলে তেড়ে খিস্তি. জীবনানন্দ নীচে বসেছিলেন, পাশে উত্তমকুমারকে ফিসফিসিয়ে বললেন, “এই লোকটাই বোধহয় ট্রামটা চালাচ্ছিল, বুঝলে….” 
ওদিকে খবরে প্রকাশ, চোদ্দ তারিখ মধ্যরাতেই স্বাধীনতা দিবস কে #স্বাধীনবলেইসফল দিবস ঘোষণা করতে হবে, এই দাবিতে যাদবপুর প্রেসিডেন্সির পড়ুয়াদের একটি মিছিল বাস্তিল দূর্গ অভিমুখে রওনা হয়েছে. মুশকিল হলো, একেই ত্রিফলাগুলো কারা ঝেঁপে দিয়েছে, তার ওপর মাথার পিছনের আলোগুলোরও লুজ কানেকশান হয়েছে, ফলে সে মিছিল রাস্তা হারিয়ে এদিকে চলে আসার সমূহ সম্ভাবনা.
  মঞ্চের পিছনে হতোদ্যম রাহুল গান্ধীকে প্রাণপণ বুঝিয়ে চলেছেন শচীন, “বুস্ট খা, এনার্জি বাড়বে.” একটু দূরে দীপা কর্মকারের মাথায় হাত বুলিয়ে দিলেন গুরুদেব, “দুঃখ করিস নে মা, মেডেলটা পেলেও বেশিদিন তোর কাছে থাকতো না, কেউ না কেউ ঠিক ঝেড়ে দিতো.”
  বাজপেয়ী তখন থেকে জ্যোতিবাবুর পিছনে ঘুরঘুর করে যাচ্ছেন আর জিজ্ঞাসা করে যাচ্ছেন, “তাই বলে অসভ্য বর্বর বলবেন ?” বিরক্ত জ্যোতিবাবু সবে ঘাড় ঘুরিয়েছেন, হঠাৎ একটা রোগাপাতলা ছেলে কাঁধে ঝোলা নিয়ে সুনীল গাঙ্গুলির কবিতাপাঠ শুনছিলো, ছুটে এসে বললো,”ওনাদের গোপালন, আপনাদের গো-পালন. তফাৎ শুধু হাইফেনে.” শুনে জনি লিভার হর্ষ ভোগলেকে ডেকে বললেন, “ওই দ্যাখ, এর নাম শ্রীজাত, তোর থেকেও বেশি ভাট বকে.”
মাঝে একবার বাল ঠাকরের সাথে অন্নদাশঙ্কর রায়ের দেখা হলো. ব্যাকগ্রাউন্ডে তারস্বরে ‘তোমরা যে সব ধেড়ে খোকা ভারত ভেঙে ভাগ করো’ বাজতে থাকায় কথোপকথন কি হলো, শোনা গেলো না.
উল্টোদিকের রাস্তায় একটা দশ বাই বারোর গোসাঘর. তলায় বড়ো করে লেখা আছে, ‘অনশন মঞ্চ.’ আশেপাশে খালি খাবারের প্যাকেট ছড়াছড়ি. মাচার ওপরে তিনি বসে বসে ক্যানভাসে ছবি আঁকছেন. নীচে এক কোটি ছিয়াশি লাখ টাকা নিয়ে অপেক্ষা করছে সুদীপ্ত সেন. তিনি একবার টাকাটার দিকে দেখছেন, আর একটা করে আঁচড় কাটছেন ক্যানভাসে. একটু পর ডেকে উঠলেন, “ও শুভাদা, একটু এদিকে আসুন তো, এটা যে কি এঁকেছি কিছুতেই বুঝতে পারছি না………………”

उस बेवकूफ आदमी के चक्कर में हमने भी शादी कर ली है* II अब तसल्ली है

*!!.अब तसल्ली है.!!*

!!.PM भी सिंगल.!!
!!.CM भी सिंगल.!!
!!.TATA भी सिंगल.!!
!!.BATA भी सिंगल.!!
!!.KALAM भी सिंगल.!!
!!.SALMAN भी सिंगल.!!
!!.RAHUL भी सिंगल.!!
!!.YOGI भी सिंगल.!!
और तो और BABA
!!.RAMDEV भी सिंगल.!!
निगाहें अब उस हरामखोर को ढूंढ रही हैं..
जिसने यह कहा था.. हर सफल आदमी के पीछे एक औरत का हाथ होता है…।
*..उस बेवकूफ आदमी के चक्कर में हमने भी शादी कर ली है*

*পরমার্থ-প্রসঙ্গ* II -স্বামী বিরজানন্দ* II স্বামীজী বলেছেন, যখনই পার, যেমন পার অপরকে সাহায্য করবে, কিন্তু কি উদ্দেশ্যে করছ সেদিকে নজর রাখবে না।



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*আজকের ভাবনা:*

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*পরমার্থ-প্রসঙ্গ*
    *-স্বামী বিরজানন্দ*
             *(৩৩১)*
স্বামীজী বলেছেন, যখনই পার, যেমন পার অপরকে সাহায্য করবে, কিন্তু কি উদ্দেশ্যে করছ সেদিকে নজর রাখবে না। যদি তুমি নিজের কোন সুবিধা বা স্বার্থসিদ্ধির জন্যে কর তো জানবে যে, তাতে যাদের সাহায্য করছ তাদের বিশেষ কিছু লাভ বা উপকার হবে না, তোমারও নয়। কিন্তু উহা যদি নিঃস্বার্থ হয়, তাহলে যাদের দিচ্ছ তাদের তো প্রভূত সুখ ও কল্যাণ হবেই, পরন্তু তার সহস্রগুণ সুখ ও কল্যাণ তোমার নিজের হবে। তোমার বেঁচে থাকাটা যেমন সত্য, এও ঠিক তেমনি ধ্রুব সত্য।



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In such a circumstance, an exhortation to rehearse "3 1/2 minutes," turns into a gift. These "3 1/2 minutes" are:



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  1. *Dear All: This is an essential message, shared by a specialist, for the individuals who get up around evening time/early morning from rest to urinate* 
  2. *Each individual must observe the 3 x 1/2 minutes essential for life.* 
  3. *Why is it imperative? 3 x 1/2 minutes will extraordinarily diminish the number of sudden deaths.* 
  4. *Often we hear that a man, who still looked solid, has kicked the bucket in the night.* 
  5. *The reason is that when you wake up around evening time to go to the restroom, usually done in a rush.* 
  6. *Immediately when we stand, the cerebrum needs blood flow.* 
  7. *In the center of the night when you are stirred by the desire to urinate, for instance, ECG example can change.* 
  8. *Because getting up all of a sudden, the mind winds up weak and causes heart disappointment because of the absence of blood.* 

*In such a circumstance, an exhortation to rehearse “3 1/2 minutes,” turns into a gift. These “3 1/2 minutes” are:*



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*1. When waking from rest, lie in bed for the first 1/2 minute;* 

*2. Sit in bed for the following 1/2 minute;* 
“*3. , sitting on the edge of the bed for the last half-minute.*”

*After 3 x 1/2 minutes, you won’t have a pallid mind, lessening the likelihood of a fall and accordingly, heart won’t fail.* 

*Share with family, companions & adored ones.* 
  1. *It can happen to pay little respect to age; youthful or old.* 
  2. *Sharing is Caring. In the event that you definitely know, view this as a refresher.”* 

If it’s not too much trouble attempt to forward this imperative Health tips to every one of your gatherings, and you/your family additionally ought to tail it.



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