একসময়ের আচার্য স্বামী বিবেকানন্দ প্রণীত ‘মঠের নিয়মাবলী’ লইয়া পরম শ্রদ্ধাস্পদ স্বামী সারদানন্দজীর কাছে জনৈক মহারাজ নিবেদন করিলেন—
‘পুণ্য স্মৃতির আলোকে অনন্যসাধারণ মহাপুরুষ স্বামী শিবানন্দজী মহারাজ’
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Swami Shivananda
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ওঁ শান্তিঃ ! ওঁ শান্তিঃ ! ওঁ শান্তিঃ !
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So long as you have a love for God and Guru, and faith in truth, nothing can hurt you, my son.II Swami Vivekananda
So long as you have a love for God and Guru, and faith in truth, nothing can hurt you, my son. But the loss of any of these is dangerous.~Swami Vivekananda
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Phalaharini Kali Puja Holy Mother day on fifth June 1872
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| Phalaharini Kali Puja |
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*Phalaharini Kali Puja Holy Mothe today!!*
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Sri Ramakrishna had made special preparations on that day with a view to worshipping the Mother of the universe. These preparations, however, had not been made in the temple, but, privately, in his own room at his desire. It was 9 pm when all the preparations for the mystery-worship of the Devi were completed. In the meantime, the Master had sent word to the Holy Mothestrong> to be present during the worship. She came to the room and the Master started the worship. The articles of worship were purified by the Mantras and all the rites preliminary to the worship were finished.
The Master beckoned to the Holy Mother to sit on the wooden seat decorated with the Alpana. While witnessing the worship, the Holy Mother had already entered into a divine semi-conscious state. Not clearly conscious, therefore, of what she was doing, she, like one charmed with Mantras, sat facing north to the right of the Master, who was seated with his face to the east. large;”>According to scriptural injunctions, the Master sprinkled the Holy Mother repeatedly with the water purified by Mantras from the pitcher placed before him, then uttered the Mantra in her hearing and then recited the prayer: O Lady, O Mother Tripurasundari who art the controller of all powers, open the door to perfection! Purify her (the Holy Mother’s) body and mind, manifest Thy-self in her and be beneficent. large;”
Afterward, the Master performed the Nyasa of the Mantras in the Holy Mother’s person according to the injunctions of the Sastras, and worshipped her with the sixteen articles, as the Devi Herself. He then offered food and put a part of it into her mouth with his own hand.
The Holy Mother lost normal consciousness and went into Samadhi. A long time passed. The second quarter of the night was over and the third had far advanced, when the Master, whose delight was only in the Self, showed a little sign of regaining normal consciousness. Returning to the semi-conscious state again, he offered himself to the Devi.
He now gave away forever at the lotus feet of the Devi his all—the results of his Sadhanas, his rosary, etc.—along with his self, and saluted her uttering the Mantras: O Thou, the auspiciousness of all auspicious things! O doer of all actions! O refuge! O the three-eyed One! O the fair complexioned spouse of Siva! O Narayani! I bow down to Thee, I bow down to Thee! The worship was at an end. The Master’s Sadhana reached its culmination with the worship of the Ruler of the universe, the Divine Mother in the body of a woman, the embodiment of spiritual knowledge itself.
Source: Ramakrishna Mission, New Delhi Holy Mother
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निधिवन – जहाँ कान्हा आजभी रचाते है रास
निधिवन – जहाँ कान्हा आजभी रचाते है रास-
5200 वर्ष पूर्व वृन्दावन की इसी धरा पर कान्हा जी ने राधारानी और गोपियों संग महारास रचाया था… द्वापर युग से आज तक हर रात राधे-कृष्ण यहां साक्षात प्रकट होते है… निधिवन में स्थित 16108 वृक्ष गोपियों मेंतब्दील होकर रातभर कान्हा संग महारास रचाती है… सूरज की पहली किरण फूटने से पहले ही गोपियां वृक्ष का आकार ले लेती है.. और भगवान कृष्ण राधिका रानी के संग अन्तर्धान हो जाते है।
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एक बार कलकत्ता का एक भक्त अपने गुरु की सुनाई हुई भागवत कथा से इतना मोहित हुआ कि वह हरसमय वृन्दावन आने की सोचने लगा उसके गुरु उसे निधिवन के बारे में बताया करते थे और कहते थे कि आज भी भगवान यहाँ रात्रि को रास रचाने आते है उस भक्त को इस बात पर विश्वास नहीं हो रहा था
और एक बार उसने निश्चय किया कि वृन्दावन जाऊंगा और ऐसा ही हुआ श्री राधा रानी की कृपा हुई और आ गया वृन्दावन उसने जी भर कर बिहारी जीका राधा रानी का दर्शन किया लेकिन अब भी उसे इसबात का यकीन नहीं था कि निधिवन में रात्रि को भगवान रास रचाते है उसने सोचा कि एक दिन निधिवन रुक कर देखता हू इसलिए वो वही पर रूक गयाऔर देर तक बैठा रहा और जब शाम होने को आई तब एक पेड़ की लता की आड़ में छिप गया
-जब शाम के वक़्त वहा के पुजारी निधिवन को खाली करवाने लगे तो उनकी नज़र उस भक्त पर पड गयी और उसे वहा से जाने को कहा तब तो वो भक्त वहा से चला गया लेकिन अगले दिन फिर से वहा जाकर छिपगया और फिर से शाम होते ही पुजारियों द्वारा निकाला गया और आखिर में उसने निधिवन में एक ऐसा कोना खोज निकाला जहा उसे कोई न ढूंढ़ सकता थाऔर वो आँखे मूंदे सारी रात वही निधिवन में बैठा रहा और अगले दिन जबसेविकाए निधिवन में साफ़ सफाई करने आई तो पाया कि एक व्यक्ति बेसुध पड़ा हुआ है और उसके मुह से झाग निकल रहा है
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तब उन सेविकाओ ने सभी कोबताया तो लोगो कि भीड़ वहा पर जमा हो गयी सभी ने उस व्यक्ति से बोलने की कोशिश की लेकिन वो कुछ भी नहीं बोल रहा था लोगो ने उसे खाने के लिएमिठाई आदि दी लेकिन उसने नहीं ली और ऐसे ही वो ३ दिन तक बिना कुछ खाएपीये ऐसे ही बेसुध पड़ा रहा और ५ दिन बाद उसके गुरु जो कि गोवर्धन में रहते थे बताया गया तब उसके गुरूजी वहा पहुचे और उसे गोवर्धन अपने आश्रम में ले आये आश्रम में भी वो ऐसे ही रहा और एक दिन सुबह सुबह उस व्यक्ति ने अपने गुरूजी से लिखने के लिए कलम और कागज़ माँगा गुरूजी ने ऐसा ही किया और उसे वो कलम और कागज़ देकर मानसी गंगा में स्नान करने चले गए जब गुरूजी स्नान करके आश्रममें आये
तो पाया कि उस भक्त ने दीवार के सहारे लग कर अपना शरीर त्याग दिया थाऔर उस कागज़ पर कुछ लिखा हुआ था उस पर लिखा था
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“गुरूजी मैंने यह बात किसी को भी नहीं बताई है,पहले सिर्फ आपको ही बताना चाहता हू ,आप कहतेथे न कि निधिवन में आज भी भगवान रास रचाने आते है और मैं आपकी कही बात पर यकीन नहीं करता था, लेकिन जब मैं निधिवन में रूका तब मैंने साक्षात बांके बिहारी का राधा रानी के साथ गोपियों के
साथ रास रचाते हुए दर्शन किया और अब मेरी जीने की कोई भी इच्छा नहीं है ,इस जीवन का जो लक्ष्य था वो लक्ष्य मैंने प्राप्त कर लिया है और अब मैं जीकर करूँगा भी क्या?
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श्याम सुन्दर की सुन्दरता के आगे ये दुनिया वालो की सुन्दरता कुछ भी नहीं है,इसलिए आपके श्री चरणों में मेरा अंतिम प्रणाम स्वीकार कीजिये”
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वो पत्र जो उस भक्त ने अपने गुरु के लिए लिखा था आज भी मथुरा के सरकारी संघ्रालय में रखा हुआ है और बंगाली भाषा में लिखा हुआ है
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कहा जाता है निधिवन के सारी लताये गोपियाँ है जो एक दूसरे कि बाहों में बाहें डाले खड़ी है जब रात में निधिवन में राधा रानी जी, बिहारी जीके साथ रास लीला करती हैतो वहाँ की लताये गोपियाँ बन जाती है, और फिर रास लीला आरंभ होती है,इस रास लीला को कोई नहीं देख सकता,दिन भर में हजारों बंदर, पक्षी,जीव जंतु निधिवन में रहते है पर जैसे ही शाम होती है,सब जीव जंतुबंदर अपने आप निधिवन में चले जाते है एक परिंदा भी फिर वहाँ पर नहीं रुकता यहाँ तक कि जमीन के अंदर के जीव चीटी आदि भी जमीन के अंदर चले जाते है रास लीला को कोई नहीं देख सकता क्योकि रास लीला इस लौकिक जगत की लीला नहीं है रास तो अलौकिक जगत की “परम दिव्यातिदिव्य लीला” है कोई साधारण व्यक्ति या जीव अपनी आँखों से देख ही नहीं सकता. जो बड़े बड़े संत है उन्हें निधिवन से राधारानी जी और गोपियों के नुपुर की ध्वनि सुनी है.
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जब रास करते करते राधा रानी जी थक जाती है तो बिहारी जी उनके चरण दबाते है. और रात्रि मेंशयन करते है आज भी निधिवन में शयन कक्ष है जहाँ पुजारी जी जल का पात्र, पान,फुल और प्रसाद रखते है, और जब सुबह पट खोलते… है तो जल पीया मिलता है पान चबाया हुआ मिलता है और फूल बिखरे हुए मिलते है.राधे……….राधे…
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वृन्दावन धाम या बरसाना कोई घूमने फिरने या पिकनिक मनाने की जगह नहीं है ये आपके इष्ट की जन्मभूमि लीलाभूमि व् तपोभूमि है सबसे ख़ास बात ये प्रेमभूमि है जब भी आओ इसको तपोभूमि समझ कर मानसिक व् शारीरिक तप किया करो शरीर से सेवा व् वाणी से राधा नाम गाया जाए तब ही धाम मे आना सार्थक है
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एक अद्भुत मस्ती ताकत व् आनंद ले कर वापिस जाया करो .आप की धाम निष्ठां मे वृद्धि हो इसी कामना से…………….राधे…………राधे……………….जी
আজব কাণ্ড: ২০ ফুট লম্বা পাখির বাসা!
আজব কাণ্ড: ২০ ফুট লম্বা পাখির বাসা!
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| আজব কাণ্ড ২০ ফুট লম্বা পাখির বাসা, |
আমরা পাখির বাসা দেখেছে। কিন্তু তাই বলে এতো বড় পাখির বাসা? এবার এমনই এক আজব কাণ্ড ঘটেছে। এক গাছের ওপর পাওয়া গেছে ২০ ফুট লম্বা পাখির বাসা!
আমরা পাখির বাসা দেখেছি। এসব বেশিরভাগ বাসা বানানো হয় গাছে। কিন্তু আপনি যদি সেই গাছের উপর দেখেন ২০ ফুট লম্বা আর ১৩ ফুট চওড়া একটি বাসা। তাহলে আপনি অবাক না হয়ে পারবেন না! ঠিক তাই ঘটেছে।
পাখির এই বাসাটির ওজন ২ হাজার পাউন্ডের কিছু বেশি। এই ধরনের বাসা প্রায় ১শ’ বছর পর্যন্ত স্থায়ী হয়। বাসার উত্তরাধিকার বংশ পরম্পরায় পেয়ে থাকে অন্য পাখিরা- এমনটি জানা গেছে। পাখির পালক, মোটা ঘাস, বাতাসে ভেসে আসা তুলো, খড়কুটো আর গাছের ডাল ইত্যাদি দিয়ে নিজেদের বাসা তৈরি করে সোস্যায়েবল ওয়েভার (Sociable weaver) নামের এই পাখিগুলো।
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| আজব কাণ্ড ২০ ফুট লম্বা পাখির বাসা, |
তবে মাঝে মাঝে নতুন খড়কুটো দিয়ে মেরামত করতে হয় এই বাসাটি। তবে সমস্যা হলো বাসাটি অক্ষুন্ন থাকলেও অনেক সময় মারা যায় বাসাটিকে আশ্রয়দাতা গাছটি। এমনকি বাসার ওজনে ভেঙেও পড়ে মাঝে-মধ্যে।
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কোন ধর্মই কখনো মানুষের উপর অত্যাচার করে না, কোনও ধর্মই ডাইনী অপবাদ দিয়া নারীকে পুড়াইয়া মারে নাই, কোন ধর্মই কখনো এই ধরনের অন্যায় কার্যের সমর্থন করে নাই।
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“আমার জীবনে যতটুকু অভিজ্ঞতা সঞ্চয় করিয়াছি,
—স্বামী বিবেকানন্দ।।।।
আমরা সারা জীবন এই ‘প’ এর পিছনেই পরিশ্রান্ত, যা পাওয়া যায় তা ‘প’ দিয়ে শুরু আর যা না পাওয়া যায় তাও ।
প’ বর্ণ আমাদের খুবই প্রিয়,
আমরা সারা জীবন এই ‘প’ এর পিছনেই পরিশ্রান্ত, যা পাওয়া যায় তা ‘প’ দিয়ে শুরু আর যা না পাওয়া যায় তাও ।
*প 👨 পতি*
*প 👩 পত্নি*
*প 👦 পুত্র*
*প 👧 পুত্রী*
*প 👪 পরিবার*
*প 💞 প্রেম*
*প 💵 পয়সা*
*প 💺 পদ*
*প 🚨 প্রতিষ্ঠা*
*প 👏 প্রশংসা*
*প ❤ প্যায়ার*
*প 🍻 পার্টী*
*প 📋 পরীক্ষা*
*প 🏅 পব্লিসিটী*
*এই সব ‘প’ এর পশ্চাদ্ধাবন করতে করতে আমরা ‘প’ দিয়ে পাপ* ও করে থাকি।
*তারপর ‘প’ দিয়ে আমাদের পতন* হয়।
অতঃপর বেঁচে থাকে ‘প’ দিয়ে পশ্চতাপ*
*পাপের ‘প’ এর পিছনেই না পরে আমরা যদি ‘প’ এর পরমাত্মা* পিছনে পরি তো আমরা ‘প’ দিয়ে পুণ্যের* ভাগীদার হতে পারি।
*অবশেষে ‘প’ দিয়ে প্রণাম জানাই..*
🙏🙏🙏
3 D PHOTO
Sri sri Mayer Jibon Kotha
*সর্ববিদ্যাস্বরূপাং তাং সারদাং প্রণমাম্যহম।।”*










