अतिसुंदर पंक्तियां – समय की .. इस अनवरतबहती धारा में.. अपने चंद सालोंका .. हिसाब क्यारखें .. !! जिंदगी ने .. दिया हैजब इतना .. बेशुमारयहाँ .. तो फिर .. जोनहीं मिला उसकाहिसाब क्या रखें.. !! दोस्तों ने .. दिया है.. इतना प्यार यहाँ .. तो दुश्मनी .. कीबातों का .. हिसाबक्या रखें .. !!Continue reading “अति सुंदर पंक्तियां”
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"মায়া বই কি! মায়া না হলে আমার এ দশা কেন? আমি বৈকুণ্ঠে নারায়ণের পাশে লক্ষ্মী হয়ে থাকতুম। ভগবান নরলীলা করতে ভালবাসেন কিনা!"*
*- : শ্রী শ্রী মায়ের জীবনকথা : -* *”ওঁ যথাগ্নের্দাহিকা শক্তিঃ রামকৃষ্ণে স্থিতা হি যা।**সর্ববিদ্যাস্বরূপাং তাং সারদাং প্রণমাম্যহম।।”* আরও আগের কথা – ১৯০৭ খ্রিস্টাব্দের ১ ফেব্রুয়ারি। শ্রীমা জয়রামবাটীতে আছেন। ভক্ত জানিতে চাহিলেন যে ঠাকুর সনাতন পূর্ণব্রহ্ম কিনা। মা তাহা সমর্থন করিলে ভক্ত আবার বলিলেন, “তা প্রত্যেক স্ত্রীলোকেরই স্বামী পূর্ণব্রহ্ম সনাতন। আমি সেভাবে জিজ্ঞাসাContinue reading “"মায়া বই কি! মায়া না হলে আমার এ দশা কেন? আমি বৈকুণ্ঠে নারায়ণের পাশে লক্ষ্মী হয়ে থাকতুম। ভগবান নরলীলা করতে ভালবাসেন কিনা!"*”
वे ही बद्ध होकर पाप में लिप्त होते हैं। लाखों जन्म भोगकर, कष्ट पाकर अन्त में उन्हें ईश्वर को पाने की इच्छा होती है। …
पुरुषार्थ एवं दैवी कृपा *।श्री माँ कीअमृतवाणी।* पुरुषार्थ एवं दैवीकृपा*३४. शिष्य:-* _जो भगवानके ऊपर निर्भरकरके पड़े रहतेहैं पर साधनानहीं करते, क्याउन्हें ईश्वर की अनुभूतिहोगी?_ *श्रीमाँ :- वे पूर्णतयाईश्वर की शरणमें जाते हैं, उन पर पूर्णविश्वास रखकर जीवनयापनकरते हैं– यहीउनकी साधना है।नरेन्द्र ने कहाथा, _‘होने दोमेरे लाखों जन्म, मुझे भय नहीं।’_ ज्ञानी को पुनर्जन्मका डर कहाँ? उनमें तो कोईपापContinue reading “वे ही बद्ध होकर पाप में लिप्त होते हैं। लाखों जन्म भोगकर, कष्ट पाकर अन्त में उन्हें ईश्वर को पाने की इच्छा होती है। …”
श्री माँ की अमृतवाणी II Maa’s Amritwani
*।श्री माँ की अमृतवाणी।* पुरुषार्थ एवं दैवी कृपा*३३. हृदय के अन्तःस्थल से भगवन्नाम का जप करो और शुद्ध हृदय से ठाकुर के शरण में जाओ। आसपास की चीजों से तुम्हारे मन में क्या विचार आते हैं, इसके बारे में चिन्ता मत करो। आध्यात्मिक पथ में तुम प्रगति कर रहे हो या नहीं, इसके सम्बन्ध मेंContinue reading “श्री माँ की अमृतवाणी II Maa’s Amritwani”
ईश्वर-प्राप्ति जीवन का उद्देश्य II पुरुषार्थ एवं दैवी कृपा II *।जपात् सिद्धि-श्रीमाँ।*
*।।ईश्वर-प्राप्ति जीवन का उद्देश्य।।* *।श्री माँ की अमृतवाणी।* पुरुषार्थ एवं दैवी कृपा*२९. यदि तुम भगवान का स्मरण नहीं करते हो – सचमुच काफी लोग ईश्वर को मानते ही नहीं – तो इससे उनका क्या? यह तो तुम्हारा ही दुर्भाग्य है। भगवान की माया ही ऐसी है कि वे सब को इसी प्रकार भुलाए रखते हैंContinue reading “ईश्वर-प्राप्ति जीवन का उद्देश्य II पुरुषार्थ एवं दैवी कृपा II *।जपात् सिद्धि-श्रीमाँ।*”
Sri Ramakrishna Vachanamrita ।।श्रीरामकृष्ण वचनामृत।।
।।श्रीरामकृष्ण वचनामृत।। @page { margin: 2cm } p { margin-bottom: 0.25cm; line-height: 120% } Sri Ramakrishna (भाग १-पेज-६०९ता.१४.९.१८८४) अब हरिनाम के माहात्म्य की बात हो रही है। _भवनाथ:- नाम करने पर मेरी देह हलकी पड़ जाती है।_ *श्रीरामकृष्ण :-“वे पाप का हरण करते हैं, इसीलिए उन्हें हरि कहते हैं। वे त्रिताप के हरण करनेवाले हैं।”*Continue reading “Sri Ramakrishna Vachanamrita ।।श्रीरामकृष्ण वचनामृत।।”
Ma’s Amritwani II श्री माँ की अमृतवाणी।* पुरुषार्थ एवं दैवी कृपा
।श्री माँ की अमृतवाणी।* पुरुषार्थ एवं दैवी कृपा*२८. ऐसे कितने लोग हैं जो सचमुच भगवान को चाहते हैं? कहाँ है ऐसी निष्ठा एवं व्याकुलता? एक ओर तो इनकी भक्ति आग्रह का भाव और दुसरी ओर जहाँ थोडे से भोग पदार्थ मिल जाएँ तो उसी में सन्तुष्ट। कहते हैं, ‘उनकी कैसी दया है।’* जय जय माँ,जयContinue reading “Ma’s Amritwani II श्री माँ की अमृतवाणी।* पुरुषार्थ एवं दैवी कृपा”
Sri Ramakrishna Vcnamrit।।श्रीरामकृष्ण वचनामृत। ईश्वर-प्राप्ति जीवन का उद्देश्य।।
।।श्रीरामकृष्ण वचनामृत।। (भाग १-पेज-६०९ता.१४.९.१८८४) _गवयै के साथ नरेन्द्र का वादविवाद हुआ था, उसी की बात चल रही है। ….._ _मुखर्जी:- नरेंद्र ने भी मोर्चा नहीं छोड़ा।_*श्रीरामकृष्ण :-“हाँ, ऐसी दृढ़ता तो चाहिए ही। इसे सत्व का तम कहते हैं। लोग जो कुछ कहेंगे क्या उसी पर विश्वास करना होगा? वेश्या से क्या यह कहा जायगा किContinue reading “Sri Ramakrishna Vcnamrit।।श्रीरामकृष्ण वचनामृत। ईश्वर-प्राप्ति जीवन का उद्देश्य।।”
पुरुषार्थ एवं दैवी कृपा II *।जपात् सिद्धि-श्रीमाँ।*
।श्री माँ की अमृतवाणी।* पुरुषार्थ एवं दैवी कृपा*२७. //pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); साधना में, कथनी और करनी में सच्चे रहो। तुम धन्य हो जाओगे!उनका आशिर्वाद जगत के सभी प्राणियों पर सदैव बरस रहा है। उसके लिए निवेदन करने की आवश्यकता नहीं। सच्चे मन से ध्यान करो। तब तुम्हें उनकी असीम कृपा का बोध होगा। Continue reading “पुरुषार्थ एवं दैवी कृपा II *।जपात् सिद्धि-श्रीमाँ।*”
কালী — আমিই সব। আমি সৃষ্টি, স্থিতি, প্রলয় করছি II নরেন্দ্র, রাখাল প্রভৃতি মঠের ভাইদের ৺শিবরাত্রি ব্রত বরাহনগর মঠ
শ্রীশ্রী রামকৃষ্ণ কথামৃত –৫৮/বরাহনগর মঠ প্রথম পরিচ্ছেদ১৮৮৭, ২১ – ২২শে ফেব্রুয়ারি নরেন্দ্র, রাখাল প্রভৃতি মঠের ভাইদের ৺শিবরাত্রি ব্রত বরাহনগর মঠ। শ্রীযুক্ত নরেন্দ্র, রাখাল প্রভৃতি আজ ৺শিবরাত্রির উপবাস করিয়া আছেন। দুইদিন পরে ঠাকুরের জন্মতিথি পূজা হইবে।বরাহনগর মঠ সবে পাঁচ মাস স্থাপিত হইয়াছে। ঠাকুর শ্রীরামকৃষ্ণ নিত্যধামে বেশিদিন যান নাই। নরেন্দ্র রাখাল প্রভৃতি ভক্তদের তীব্র বৈরাগ্য। একদিন রাখালের পিতাContinue reading “কালী — আমিই সব। আমি সৃষ্টি, স্থিতি, প্রলয় করছি II নরেন্দ্র, রাখাল প্রভৃতি মঠের ভাইদের ৺শিবরাত্রি ব্রত বরাহনগর মঠ”